Jaun Elia Shyari
इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे
सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर
अब किसे रात भर जगाती है
मुझे अब तुम से डर लगने लगा है
तुम्हें मुझ से मोहब्बत हो गई क्या
हम को यारों ने याद भी न रखा
'जौन' यारों के यार थे हम तो
मुस्तक़िल बोलता ही रहता हूँ
कितना ख़ामोश हूँ मैं अंदर से
क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
आख़िरी बार मिल रही हो क्या
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था
आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे
कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
क्या सितम है कि अब तिरी सूरत
ग़ौर करने पे याद आती है
बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या
मैं जो हूँ 'जौन-एलिया' हूँ जनाब
इस का बेहद लिहाज़ कीजिएगा
यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
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